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करोना वायरस की टेस्टिंग क्यों जरूरी है इस बारे में बात करने से पहले टेस्ट संबंधित कुछ आंकड़ों पर नजर डाल लेते है –
भारत –
प्रति 10 लाख टेस्ट – 129
कुल टेस्ट – 177,584
कुल पॉजिटिव – 6,771
पॉजिटिव केस प्रतिशतता – 3.8%
कुल रिकवर – 641
रिकवर प्रतिशतता – 9.4%
अमेरिका –
प्रति 10 लाख टेस्ट – 7,181
कुल टेस्ट – 2,376,977
कुल पॉजिटिव – 468,895
पॉजिटिव केस प्रतिशतता – 19.7%
कुल रिकवर – 25,928
रिकवर प्रतिशतता – 5.5%
आस्ट्रेलिया
प्रति दस लाख टेस्ट – 12,946
कुल टेस्ट – 330,134
कुल पॉजिटिव – 6,203
पॉजिटिव केस प्रतिशतता – 1.8%
कुल रिकवर – 2,987
रिकवर प्रतिशतता – 48%
पाकिस्तान
प्रति दस लाख टेस्ट – 248
कुल टेस्ट – 54,706
कुल पॉजिटिव – 4,601
पॉजिटिव केस प्रतिशतता – 8.4%
कुल रिकवर –727
रिकवर प्रतिशतता – 15.8%
रशिया –
प्रति दस लाख टेस्ट – 7,469
कुल टेस्ट – 1,090,000
कुल पॉजिटिव – 11,917
पॉजिटिव केस प्रतिशतता – 9.1 %
कुल रिकवर –795
रिकवर प्रतिशतता – 6.6 %
लॉकडाउन का फैसला भारत में काफी देरी, जल्दबाजी और बिना तैयारी के लिया गया। इसका एक अर्थ यह भी है जब संक्रमण लोगो में फैलना शुरू हो गया सरकार तक हालात बिगड़ने की सूचनाएं पहुँची होंगी तब फौरी तौर पर यह कदम उठाया गया होगा। लॉकडाउन से निसंदेह संक्रमण फैलने की गति तो कम हुई ही है। लेकिन साथ के साथ भारत का आंकड़ा अभी तक 129 प्रति मिलियन टेस्ट है जो स्थिति की सही जानकारी के लिए बहुत कम है।
भारत में प्रति दिन बीमारियों व अन्य कारणों से मरने वाले लोगों की संख्या 30 से 35 हजार है, इसमें और 10-20 हजार लोग और जुड़ जाएंगे तो क्या फर्क पड़ने वाला है या कितने लोगों को मालूम पड़ने वाला है, कही शासन प्रशासन डंडे से इस तरह की परिस्थितियों से इसी मानसिकता से तो नहीं निबट रहा है और जो जरूरी अन्य कदम है उनके प्रति भयंकर लापरवाही बरत रहा है। भारत के अब तक के आँकड़े बाकी देशों से बहुत अलग नहीं है तो किसी भूल में रहना और एक एक दिन कि लापरवाही लोगों को कितनी भारी पड़ सकती है इस बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए।
कई शहर में एक-एक दो-दो केस ही केवल बताये गए तो क्या यह माना जाए कि जांच से पहले वह अपने परिवार के, यात्रा करते हुए बिल्कुल लोगो के सम्पर्क में नहीं आए होंगे।
टेस्ट रिपोर्ट वापिस मिलने में 10 से 15 दिन का समय लग रहा है, इतने समय तक जो व्यक्ति वायरस संक्रमित है क्या वह दूसरे लोगों के संपर्क में बिल्कुल नहीं आ रहे होंगे या दूसरे लोगों को संक्रमित नहीं कर रहे होंगे?
कुछ केस में सेंपल लोगो के मरने के बाद लिए गए जब उनके सारे क्रिया-कर्म पूरे हो चुकने वाले थे। तब क्या बाकी लोग बिल्कुल संक्रमित नहीं हुए होंगे!
कुछ केस ऐसे भी सामने आए है जहां मरीज की मौत के सारे लक्षण करोना संक्रमित होने की और इंगित कर रहे थे लेकिन उनकी जांच नहीं की गई। रोज संक्रमित लोगो की संख्या लगभग 500 से 600 मामले नए है। अब ऐसा तो है नहीं कि यह 500-600
रोज नए संक्रमित हो रहे है। इसका मतलब यह है कि बाहर संक्रमण बहुत लोगो में है व एक दूसरे में फैल रहा है । सरकारी मशीनरी केवल 500-600 तक गिन पा रही है। इतने में जो छूट जा रहे है अगले दिन या उससे अगले दिन या आगे तक उनसे भी लगातार बाकी लोगो में संक्रमण जा रहा होगा। इस बीमारी से निबटने का अभी तक
असरदार तरीका यही है कि अधिक से अधिक संख्या में टेस्ट कराए जाये ताकि संक्रमित व्यक्ति खुद को अलग रख सके और दूसरे व्यक्तियों को संक्रमित न करें।
प्रशासन को चाहिए कि गाँव शहर सब जगह टीम गठित करके कपड़े के मास्क बनवा कर सभी लोगों तक पहुचाएं जाये।
जरूरी नहीं है कि आपदा के भयावह परिणाम जब हमारी आँखों के सामने आने लगे तभी हम नींद से जागे या ईश्वर के भरोसे ही बैठे रहे कि जो होगा देखा जायेगा , पहले भी सतर्क हो कर आपदा को टाला जा सकता है। इसके लिए सबसे पहली जरूरत यहीं है
कि युद्ध स्तर पर टेस्टिंग शुरू की जाये इसके लिए शासन प्रशासन पर दवाब बनाया जाए।
सादर.
Nishant Rana
Social thinker, writer and journalist.
An engineering graduate; devoted to the perpetual process of learning and exploring through various ventures implementing his understanding on social, economical, educational, rural-journalism and local governance.